Tuesday, 28 February 2012

दीवारों से मिलकर रोना (Deewaro Se Milkar Rona)

दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे, ऐसा लगता है

दुनिया भर की यादें हमसे मिलने आती हैं
शाम ढले इस सूने घर में मेला लगता है

कितने दिनों के प्यासे होंगे यारों सोचो तो
शबनम का कतरा भी जिनको दरिया लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे, ऐसा लगता है

किसको कैसर पत्थर मारूं कौन पराया है
शीश-महल में एक एक चेहरा अपना लगता है
हम भी पागल हो जायेंगे, ऐसा लगता है

Wednesday, 1 February 2012

तुम्हे और क्या दूँ मैं दिल के सिवाय (Tumhe Aur Kya Du Main Dil Ke Siway)

तुम्हे और क्या दूँ मैं दिल के सिवाय
तुमको हमारी उमर लग जाए

मुरादें हों पूरी सजे हर तमन्ना
मुहब्बत की दुनिया के तुम चाँद बनना
बहारों की मंजिल पे हँसना-हँसाना
ख़ुशी में हमारी भी आवाज़ सुनना
कभी ज़िन्दगी में कोई ग़म न आये
तुमको हमारी उमर लग जाए

मुझे जो ख़ुशी है तुम्हें क्या बताऊँ
भला दिल की धड़कन को कैसे छिपाऊं
कहीं हो न जाऊं ख़ुशी से मैं पागल
तुम्हें देख कर और भी मुस्कुराऊं
खुदा दिलजलों की नज़र से बचाए
तुमको हमारी उमर लग जाए

सितारों से ऊंचा हो रूतबा तुम्हारा
बनो तुम हर इक ज़िन्दगी का सहारा
तुम्हें जिससे उल्फत हो मिल जाए तुमको
समझ लो हमारी दुआ का इशारा
मुक़द्दर तुम्हारा सदा जगमगाए
तुमको हमारी उमर लग जाए

Friday, 13 January 2012

सेवा है यज्ञ कुंड समिधा सम हम जले (Sewa Hai Yagya Kund...)

सेवा है यज्ञ कुंड समिधा सम हम जले
ध्येय महासागर में सरित रूप हम मिले
लोकयोगक्षेम ही राष्ट्र अभय गान है
सेवारत व्यक्ति व्यक्ति कार्य का ही प्राण है         ध्रु

उच्चनीच भेद भूल एक हम सभी रहे
सहज बंधू भाव हो रागद्वेष ना रहे
सर्वदिक प्रकाश हो ज्ञानदीप बाल दो
चरण शीघ्र ढृढ़ बढे ध्येय शिखर हम चढ़े           १

मुस्कुराते खिल उठे मुकुल पात पात में
लहर लहर सम उठे हर प्रघात घात में
स्तुति निंदा रागलोभ यश विरक्ति चाह से
कर्म शेत्र में बढे सहज स्नेह भाव से                 २

दीनहीन सेवा ही परमेष्टि अर्चना
केवल उपदेश नहीं कर्मरूप साधना
मनवाचा कर्मसे सदैव एकरूप हो
शिवसुंदर नवसमाज विश्ववन्द्य हम गढे       ३   

युग युग से हिंदुत्व सुधा की, बरस रही मंगलमय धार (yug yug se hindutva sudha ki)

युग युग से हिंदुत्व सुधा की, बरस रही मंगलमय धार
भारत की हो जय-जयकार भारत की हो जय-जयकार

भारत ने ही सारे जग को ज्ञान और विज्ञान दिया
अनुपम स्नेह भरी दृष्टि से जन-जन का उपकार किया
जननी की पावन पूजा का सुखमय रूप हुआ साकार                     १

भारत अपने भव्य रूप  को धरती पर फिर प्रकटाए
नष्ट करे सारे दोषों को समरसता नित सरसाए
पुण्य धरा के अमर पुत्र हम पहिचाने निज शक्ति अपार               २

भारत भक्ति ह्रदय में भरकर अनथक तप दिन रत करे 
शाखा रूपी नित्य साधना सुन्दर सुगठित रूप वरे 
निर्भय होकर बढे निरंतर ढृढ़ता से जीवनव्रत धार                    ३

Friday, 23 December 2011

जाग दर्दे इश्क जाग (Jaag Darde Ishq Jaag)

जाग दर्दे इश्क जाग - (२)
दिल को बेक़रार कर, छेड़ के आंसुओ का राग
जाग  दर्दे इश्क जाग - (२)
जाग .... जाग .....

किसको सुनाऊ दास्ताँ, किसको दिखाऊ दिल के दाग
जाऊ कहा की दूर तक, जलता नहीं कोई चिराग - (२)
राख़ बन चुकी है आग - (२)
दिल को बेक़रार कर, छेड़ के आंसुओ का राग
जाग .... जाग .....

ऐसी चली हवा-ए-गम, ऐसा बदल गया समां - (२)
रूठ के मुझसे चल दिए - २ मेरी ख़ुशी  के कारवां
डस रहें हैं ग़म के नाग
जाग दर्दे इश्क जाग - (२)
दिल को बेक़रार कर, छेड़ के आंसुओ का राग
जाग  दर्दे इश्क जाग

आँख जरा लगी तेरी, सारा जहाँ सो गया
यह जमीं सो गयी, असमान सो गया, सो गया प्यार का चिराग
जाग, जाग, जाग .........

पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई (Puchho Na Kaise Maine Rain Bitayee)

पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई
इक पल जैसे, इक युग बीता - २
युग बीते मोहे नींद न आई
पूछो न कैसे ...

(ना कही चंदा, ना कही तारे
ज्योत के प्यासे मेरे, नैन बिचारे) - २
भोर भी आस की किरण न लायी
पूछो न कैसे ...

इक जले दीपक इक  मन मेरा ...
इक जले दीपक इक  मन मेरा
फिर भी न जाए मेरे घर का अँधेरा
तडपत तरसत उम्र गवाई
पूछो न कैसे ...

Tuesday, 20 December 2011

ये महलो, ये तख्तो, ये ताजो की दुनिया (Ye Mahlo Ye Takhto Ye Taajo Ki Duniya)

ये महलो, ये तख्तो, ये ताजो की दुनिया,
ये इंसान के दुश्मन समाजो की दुनिया,
ये दौलत के भूखे रवाजो की दुनिया,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या हैं?

हर एक जिस्म घायल, हर एक रूह प्यासी,
निगाहों में उलझन, दिलो में उदासी,
ये दुनिया है या आलम-इ-बदहवासी,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या हैं?

यहाँ एक खिलौना है इंसा की हस्ती,
ये बस्ती है मुर्दा-परस्तो की बस्ती,
यहाँ तो जीवन से है मौत सस्ती,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या हैं?

जवानी भटकती है बदकार बन कर,
जवा जिस्म सजते हैं बाज़ार बन कर,
यहाँ प्यार होता है व्यापार बन कर,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या हैं?

ये दुनिया जहां आदमी कुछ नहीं है,
वफ़ा कुछ नहीं, दोस्ती कुछ नहीं है,
यहाँ प्यार की कद्र ही कुछ नहीं है,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या हैं?

जला दो इसे, फूँक डालो ये दुनिया,
मेरे सामने से हटा लो ये दुनिया ,
तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या हैं?