Wednesday, 23 November 2011

ज़िन्दगी में जब तुम्हारे गम नहीं थे (Jindagi Me Jab Tumhare Gam Nahi The)

ज़िन्दगी में जब तुम्हारे गम नहीं थे
इतने तनहा थे की हम भी हम नहीं थे

वक़्त पर जो लोग काम आये हैं अक्सर
अजनबी थे, वो मेरे हमदम नहीं थे

बेसबब था तेरा मिलना रहगुज़र में
हादसे हर मोड़ पर कुछ कम नहीं थे

हमने ख्वाबो में खुदा बनकर भी देखा
आप थे, बाहों में दो आलम नहीं थे

सामने दीवार थी खुद्दारियों की
वरना रस्ते प्यार के पुराकम नहीं थे

Saturday, 12 November 2011

मेरे दीवानेपन की भी दवा नहीं

मेरे दीवानेपन की भी दवा नहीं
मेरे दीवानेपन की भी दवा नहीं
मैंने जाने क्या सुन लिया तुम ने तो कुछ कहा नहीं

मैं ये समझा मेरे दिल की कोई हसरत निकल गयी
तूने देखा मुझे ऐसे के तबियत मचल गयी
वरना तेरे सर की क़सम आदमी मैं बुरा नहीं

बे-अदब हूँ मैं दीवाना किस कदर तू खफा हुयी
छू लिया क्यूँ बदन तेरा तौबा कैसी खता हुयी
सारी दुनिया में कोई मेरे लायक सज़ा नहीं

चांदनी रात में जैसे रूफ-इ-गुल पे किरण पड़ी
बे-सबब रूठ कर तेरे माथे पे यूं शिकन पड़ी
मेरे महबूब ये तेरी बेरुखी है अदा नहीं

दिए जलते है, फुल खिलते है

दिए जलते है, फुल खिलते है
बड़ी मुश्किल से मगर, दुनिया में दोस्त मिलते है

जब जिस वक्त किसी का, यार जुदा होता है
कुछ ना पूछो यारो दिल का, हाल बुरा होता है
दिल पे यादों के जैसे तीर चलते है

इस रंगरूप पे देखो, हरगीज नाज ना करना
जान भी मांगे यार तो दे देना, नाराज ना करना
रंग उड़ जाते है, धुप ढलते है

दौलत और जवानी, इक दिन खो जाती है
सच कहता हूँ, सारी दुनिया दुश्मन हो जाती है
उमरभर दोस्त लेकिन  साथ चलते है

Saturday, 5 November 2011

ये कहाँ आ गए हम, यूँ ही साथ साथ चलते

मैं और मेरी तनहाई, अक्सर ये बाते करते हैं
तुम होती तो कैसा होता
तुम ये कहती, तुम वो कहती
तुम इस बात पे हैरान होती
तुम उस बात पे कितना हँसती
तुम होती तो ऐसा होता, तुम होती तो वैसा होता
मैं और मेरी तनहाई, अक्सर ये बाते करते हैं

ये कहाँ आ गए हम, यूँ ही साथ साथ चलते
तेरी बाहों में हैं जानम, मेरे जिस्म-ओ-जान पिघलते

ये रात हैं या, तुम्हारी जुल्फे खुली हुयी है
है चांदनी या तुम्हारी नज़रों से मेरी राते धुली हुयी है
ये चाँद है, या तुम्हारा कंगन
सितारे है, या तुम्हारा आँचल
हवा का झोंका है, या तुम्हारे बदन की खुशबू
ये पत्तियों की हैं सरसराहट, के तुम ने चुपके से कुछ कहा है
ये सोचता हूँ, मैं कब से गुमसुम
के जब के, मुझको को भी ये खबर है, के तुम नहीं हो, कही नहीं हो
मगर ये दिल हैं के कह रहा है, तुम यही हो, यही कही हो

तू बदन है, मैं हूँ छाया, तू ना हो तो मैं कहाँ हूँ
मुझे प्यार करनेवाले, तू जहाँ हैं मैं वहाँ हूँ
हमे मिलना ही था हमदम, किसी राह भी निकलते

मेरी सांस सांस महके, कोई भीना भीना चन्दन
तेरा प्यार चांदनी है, मेरा दिल हैं जैसे आँगन
हुयी और भी मुलायम, मेरी शाम ढलते ढलते

मजबूर ये हालात, इधर भी है, उधर भी
तनहाई की एक रात, इधर भी है, उधर भी
कहने को बहोत कुछ हैं मगर किस से कहे हम
कब तक यूँ ही खामोश रहे हम और सहे हम
दिल कहता हैं दुनियाँ की हर एक रस्म उठा दे
दिवार जो हम दोनों में है, आज गिरा दे
क्यों दिल में सुलगते रहे, लोगों को बता दे
हां हम को मोहब्बत है, मोहब्बत है, मोहब्बत
अब दिल में यही बात, इधर भी है, उधर भी

तुमको देखा तो ये खयाल आया (Tum Ko Dekha To Ye Khayal Aaya)

तुमको देखा तो ये खयाल आया
जिंदगी धुप, तुम घना साया

आज फिर दिल ने एक तमन्ना की
आज फिर दिल को हम ने समझाया

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे
हमने क्या खोया हमने क्या पाया

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते
वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गाया

यारा सिली सिली, बिरहा के रात का जलना

यारा सिली सिली, बिरहा के रात का जलना
ये भी कोइ जीना हैं, ये भी कोइ मरना

टूटी हुयी चुडीयों से, जोडू ये कलाई मैं
पिछली गली में जाने, क्या छोड़ आयी मैं
बीती हुयी गलियों से, फिर से गुजरना

पैरों में ना साया कोइ, सर पे ना साई रे
मेरे साथ जाए ना, मेरी परछाई रे
बाहर उजाला हैं, अन्दर विराना

वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है

वो शाम कुछ अजीब थी, ये शाम भी अजीब है
वो कल भी पास पास थी, वो आज भी करीब है

झुकी हुयी निगाहों में, कही मेरा ख़याल था
दबी दबी हंसी में, एक हसीं सा गुलाल था
मैं सोचता था, मेरा नाम गुनगुना रही हैं वो
न जाने क्यों लगा मुझे के मुस्कुरा रही हैं वो

मेरा ख़याल है, अभी झुकी हुयी निगाहों में
खिली हुयी हँसी भी है, दबी हुयी सी चाह में
मैं जानता हूँ, मेरा नाम गुनगुना रही हैं वो
यही ख़याल हैं मुझे के साथ आ रही हैं वो