Monday, 31 October 2011

मधुबन खुशबू देता है (Madhuban Khushbu Deta Hai)

मधुबन खुशबू देता है, सागर सावन देता है
जीना उसका जीना है, जो औरो को जीवन देता है
मधुबन खुशबू देता है

सूरज ना बन पाए तो, बनके दीपक जलता चल - २
फूल मिले या अंगारे, सच की राहो पे चलता चल - २
प्यार दिलो को देता है, अश्को को दामन देता है
जीना उसका जीना है, जो औरो को जीवन देता है
मधुबन खुशबू देता है

चलती है लहराके पवन, के सांस सभी की चलती रहे  - २
लोगो ने त्याग दिए जीवन, के प्रीत दिलो में पलती रहे  - २
दिल वोह दिल है जो औरो को, अपनी धडकन देता है
जीना उसका जीना है, जो औरो को जीवन देता है

रात और दिन दिया जले, मेरे मन में फिर भी अंधियारा है raat aaur din diyaa jale, mere man mein fir bhee andhiyaaraa hai

रात और दिन दिया जले, मेरे मन में फिर भी अंधियारा है
जाने कहा है, ओ साथी, तू जो मिले जीवन उजियारा है

पग पग मन मेरा ठोकर खाए, चाँद सूरज भी राह ना दिखाए
एसा उजाला कोइ मन में समाये, जिस से पीया का दर्शन मिल जाए

गहरा ये भेद कोइ मुझ को बताये, किसने किया हैं मुझपर अन्याय
जिस का हो दीप वो सुख नहीं पाए, ज्योत दिए की दूजे घर को सजाये

खुद नहीं जानू ढूंढें किस को नजर, कौन दिशा हैं मेरे मन की डगर
कितना अजब ये दिल का सफ़र, नदियाँ में आये जाए जैसे लहर

इस मोड़ से जाते हैं कुछ सुस्त कदम रस्ते (is mod se jaate hain kuchh sust kadam raste)

इस मोड़ से जाते हैं
कुछ सुस्त कदम रस्ते
कुछ तेज़ कदम राहें
इस मोड़ से जाते हैं

सहारा की तरफ  जा कर
इक राह बगोलों में
खो जाती है चकरा कर
इक राह उधादाती सी
छिलती हुयी काँटों से
जंगल से गुज़रती है
इक दौड़ के जाती है
और कूद के गिरती है
अनजान कलाओं में
इस मोड़ से जाते हैं

उस मोड़ पे बैठा हूँ   
जिस मोड़ से जाती है
हर एक तरफ राहें
इक रोज़ तो यूं होगा
इस मोड़ पे आकर तुम
रुक जाओगी कह दोगी 
वो कौन सा रास्ता है
जिस राह पे जाना है - २
वो कौन सा रास्ता है
जिस राह पे जाना है

ज़िन्दगी मेरे घर आना आना ज़िन्दगी (Zindagi Mere Ghar Aana Aana Zindagi)

ज़िन्दगी ज़िन्दगी मेरे घर आना आना ज़िन्दगी
ज़िन्दगी ज़िन्दगी मेरे घर आना आना ज़िन्दगी

मेरे घर का सीधा सा इतना पता है
ये घर जो है चारों तरफ से खुला है
न दस्तक ज़रूरी, न आवाज़ देना
मेरे घर का दरवाज़ा कोई नहीं है
हैं दीवारें गुम और छत भी नहीं है
बढ़ी धुप है दोस्त
बढ़ी धुप है दोस्त
तेरे आँचल का साया चुराके जीना है
जीना जीना ज़िन्दगी, ज़िन्दगी
ओ ज़िन्दगी मेरे घर आना
आना ज़िन्दगी ज़िन्दगी मेरे घर आना

मेरे घर का सीधा सा इतना पता है
मेरे घर के आगे मोहब्बत लिखा है
न दस्तक ज़रूरी, न आवाज़ देना
मैं सांसों की रफ़्तार से जान लुंगी
हवाओं की खुशबू से पहचान लुंगी
तेरा फूल हूँ दोस्त
तेरी भूल हूँ दोस्त
तेरे हाथों में चेहरा छुपा के जीना है जीना 
जीना  ज़िन्दगी, ज़िन्दगी ओ  ज़िन्दगी
मेरे घर आना
आना ज़िन्दगी ज़िन्दगी मेरे घर आना

होंठों से छू लो तुम (Honthon Se Chulo Tum)

होंठों से छू लो तुम
मेरा गीत अमर कर दो
बन जाओ मित मेरे
मेरी प्रीत अमर कर दो

न उम्र की सीमा हो
न जनम का हो बंधन
जब प्यार करे कोई
तो देखे केवल मन
नयी रीत चलाकर तुम
ये रीत अमर कर दो

होंठों से छू लो तुम

जग ने छिना मुझसे
मुझे जो भी लगा प्यारा
सब जीता किये मुझसे
मैं हर दम ही हारा
तुम हार के दिल अपना
मेरी जित अमर कर दो

होंठों से छू लो तुम

आकाश का सूनापन
मेरे तनहा मन में
पायल छनकाती तुम
आजाओ जीवन में
साँसें देकर अपनी
संगीत अमर कर दो

होंठों से छू लो तुम  

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है (Kabhi kabhi mere dil mein khayaal aata hai)

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
की जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिए
तू अबसे पहले सितारों में बस रही थी कहीं
तुझे ज़मीन पे बुलाया गया है मेरे लिए

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
की ये बदन ये निगाहें मेरी अमानत हैं
ये केसुओं की घनी छाओं हैं मेरी खातिर
ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
की जैसे बजती हैं शेहनाइयां सी राहों में
सुहाग रात हैं घूंघट उठा रहा हूँ मैं
सिमट रही है तू शरमा के अपनी बाहों में

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
की जैसे तू मुझे चाहेगी उम्र भर यूहीं
उठेगी मेरी तरफ प्यार की नज़र यूहीं
मैं जानता हूँ की तू गैर है मगर यूहीं

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है

बड़े बड़ाई न कर बड़े न बोले बोल (bade badaai na kare bade na bole bol)

बड़े बड़ाई न करे बड़े न बोले बोल - २
रहीमा लाख दफा मेरो मोल - २

(हिरा मुख से न कहे लाख टका मेरा मोल)

जो बड़ें को लघु कहे नहीं रहीम घट जाए - २
गिरधर मुरलीधर कहे कछु दुःख मानत नाई
रहीमा कछु दुःख मानत नाई

ग्यानी से कहिये कहा कहत कबीर लजाय - २
अंधे आगे नाचते कला अकारत जाय
कबीरा कला अकारत जाय

ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोल - २
औरन को शीतल करे आप उसी संग होय
कबीरा आप उसी संग होय

रात गवई सोये के दिवस गवायो खाय - २
हीरा जनम अमोल का कौड़ी बदले जाय
कबीरा कौड़ी बदले जाय

तुलसी भरोसे राम के निर्भय होके सोये  - २
अनहोनी होनी नहीं  होनी हो सो होय
रे तुलसी होनी हो सो होय

मेरी भव बाधा हरो राधा नागर सोय  - २
जा तनु किधाई परे शाम हरित  द्विति  होय
बिहारी शाम हरित द्विति होय

दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोई  - २
जो सुख में सुमिरन करे तो दुःख काहे को होय
कबीरा दुःख काहे को होय

आवत ही हर्षे नहीं नैनं नहीं सनेह - २
तुलसी तहा न जाए चाहे कंचन बरसे मेह
तुलसी चाहे कंचन बरसे मेह

बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया कोई  - 2
जो दिल खोजा आपना मुझसे बुरा न कोय
कबीरा  मुझसे बुरा न कोय

रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय - २
टूटे से फिर न जुड़े जुड़े गाठ पड़ जाए
रहीमा जुड़े गाठ  पड़ जाए

बिगड़ी बात बने नहीं लाख करो किन्कोई  - २
रहिमन बिगड़े दूध को मथे न माखन होय
रहीमा मथे  न माखन होय