हम ने देखी है, उन आखों की महकती खुशबू हाथ से छूके इसे, रिश्तो का इल्जाम ना दो सिर्फ एहसास हैं ये, रूह से महसूस करो प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो प्यार कोई बोल नहीं, प्यार आवाज नहीं एक खामोशी हैं सुनती हैं कहा करती हैं न ये बुझती है, न रुकती है, न ठहरी हैं कही नूर की बूँद है, सदियों से बहा करती हैं मुस्कराहट सी खिली रहती हैं आँखों में कही और पलको पे उजाले से झुके रहते हैं होठ कुछ कहते नहीं, कापते होठों पे मगर कितने खामोश से अफसाने रुके रहते हैं
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Friday, 4 November 2011
हम ने देखी है, उन आखों की महकती खुशबू (Hamne Dekhi Hai In Aankho Ki Mahakti Khushbhoo)
हम को मन की शक्ती देना, मन विजय करे (Hum Ko Man Ki Shakti Dena)
हम को मन की शक्ती देना, मन विजय करे दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करे भेदभाव अपने दिल से साफ़ कर सके दोस्तों से भूल हो तो माफ़ कर सके झूठ से बचे रहे, सच का दम भरे दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करे मुश्किलें पड़े तो हम पे इतना करम कर साथ दे तो धरम का, चले तो धरम कर खुद पे हौसला रहे, बदी से ना डरे दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करे
गुलमोहर गर तुम्हारा नाम होता Gulmohar Gar Tumhara Naam Hota
गुलमोहर गर तुम्हारा नाम होता
मौसम-इ-गुल को हसाना भी हमारा काम होता
आएँगी बहारें तो अबके उन्हें कहना ज़रा
इतना सुने
मेरे गुल बिना कहाँ उनका बहार नाम होता
गुलमोहर गर तुम्हारा नाम होता ...
शाम के गुलाबी से आँचल में एक दिया जला
है चाँद का
मेरे उन बिना कहाँ उसका चाँद नाम होता
गुलमोहर गर तुम्हारा नाम होता ...
मौसम-इ-गुल को हसाना भी हमारा काम होता
आएँगी बहारें तो अबके उन्हें कहना ज़रा
इतना सुने
मेरे गुल बिना कहाँ उनका बहार नाम होता
गुलमोहर गर तुम्हारा नाम होता ...
शाम के गुलाबी से आँचल में एक दिया जला
है चाँद का
मेरे उन बिना कहाँ उसका चाँद नाम होता
गुलमोहर गर तुम्हारा नाम होता ...
बोले रे पपीहरा, पपीहरा bole re papeeharaa, papeeharaa
बोले रे पपीहरा, पपीहरा
नीत घन बरसे, नीत मन प्यासा
नीत मन प्यासा, नीत मन तरसे
पलकों पर एक बूँद सजाये
बैठी हूँ सावन ले जाए
जाए पी के देस में बरसे
नीत मन प्यासा, नीत मन तरसे
सावन जो संदेसा लाये
मेरी आँख से मोती पाए
जान मिले बाबूल के घर से
नीत मन प्यासा, नीत मन तरसे
आज कल पाँव जमीन पर नहीं पड़ते मेरे aaj kal paaw jameen par naheen padate mere
आज कल पाँव जमीन पर नहीं पड़ते मेरे
बोलो देखा हैं कभी, तुमने मुझे उड़ते हुए
जब भी थामा हैं तेरा हाथ तो देखा हैं
लोग कहते हैं की, बस हाथ की रेखा हैं
हम ने देखा हैं दो तकदीरों को जुड़ते हुए
नींद सी रहती है, हलकासा नशा रहता हैं
रात दिन आखों में, एक चेहरा बसा रहता हैं
पर लगी आखों को देखा हैं कभी उड़ते हुए
जाने क्या होता है, हर बात पे कुछ होता हैं
दिन में कुछ होता है, और रात में कुछ होता हैं
थाम लेना जो कभी देखो हमे उड़ते हुए
बोलो देखा हैं कभी, तुमने मुझे उड़ते हुए
जब भी थामा हैं तेरा हाथ तो देखा हैं
लोग कहते हैं की, बस हाथ की रेखा हैं
हम ने देखा हैं दो तकदीरों को जुड़ते हुए
नींद सी रहती है, हलकासा नशा रहता हैं
रात दिन आखों में, एक चेहरा बसा रहता हैं
पर लगी आखों को देखा हैं कभी उड़ते हुए
जाने क्या होता है, हर बात पे कुछ होता हैं
दिन में कुछ होता है, और रात में कुछ होता हैं
थाम लेना जो कभी देखो हमे उड़ते हुए
आँखों में हमने आप के सपने सजाये हैं Aankhon Mein Hamne Aap Ke Sapne Sajaaye Hain
आँखों में हमने आप के सपने सजाये हैं
पलकें उठा के आप ने जादू जगाये हैं सपना भी आप ही हैं हकीकत भी आप हैं
बस आप आप आप ही मुझमें समाये हैं
आँखों का रंग ढूंढा है हीरे तलाश कर
दिल में सजायेंगे ये रंग यूँ ही उम्र भर
मुश्किल से ज़िन्दगी के
मुश्किल से ज़िन्दगी के, रंग हाथ आये हैं
आँखों में हमने आप के सपने सजाये हैं
दोहराए जायेंगे न ये लम्हात अब कभी
सपनों में भी न छूटेगा ये साथ अब कभी
मिलती है ज़िन्दगी जब आप मुस्कुराए हैं
ये दिल कुछ ऐसे आप के सजदे में झुक गया
नज़रे उठायी आप ने तो वक़्त रुक गया
ठहरे हुए पलों में
ठहरे हुए पलों में, ज़माने बिताये हैं
आँखों में हमने आप के सपने सजाये हैं
आप की आँखों में कुछ महके हुए से राज़ है (Aap Ki Aankho Me Kuchh Mahake Hue Se Raaj Hai)
आप की आँखों में कुछ महके हुए से राज़ है (२)
आप से भी ख़ूबसूरत आप के अंदाज़ है
आप की आँखों में कुछ महके हुए से राज़ है
लब हिले तो मोगरे के फूल खिलते है कहीं (२)
आप की आँखों में क्या साहिल भी मिलते है कहीं
आप की खामोशियाँ भी आप की आवाज़ है
आप की बातों में फिर कोई शरारत तो नहीं (२)
बेवजह तारीफ़ करना आप की आदत तो नहीं
आप की बदमाशियों के यह नए अंदाज़ है
आप से भी ख़ूबसूरत आप के अंदाज़ है
आप की आँखों में कुछ महके हुए से राज़ है
लब हिले तो मोगरे के फूल खिलते है कहीं (२)
आप की आँखों में क्या साहिल भी मिलते है कहीं
आप की खामोशियाँ भी आप की आवाज़ है
आप की बातों में फिर कोई शरारत तो नहीं (२)
बेवजह तारीफ़ करना आप की आदत तो नहीं
आप की बदमाशियों के यह नए अंदाज़ है
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