Wednesday, 2 November 2011

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को Jaise suraj ki garmi se jalte hue tan ko

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला हैं मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम

भटका हुआ मेरा मन था, कोई मिल ना रहा था सहारा
लहरों से लडती हुयी नाव को जैसे मिल ना रहा हो किनारा
उस लडखडाती हुयी नाव को जो किसी ने किनारा दिखाया

शीतल बने आग चन्दन के जैसी, राघव कृपा हो जो तेरी
उजियाली पूनम की हो जाए रातें, जो थी अमावस अंधेरी
युग युग से प्यासी मरुभूमी में जैसे सावन का संदेस पाया

जिस राह की मंझील तेरा मिलन हो, उस पर कदम मैं बढ़ाऊ
फूलों में खारों में, पतझड बहारों में, मैं ना कभी डगमगाऊ
पानी के प्यासे को तकदीर ने जैसे जी भर के अमृत पिलाया

ये गर्व भरा, मस्तक मेरा Ye Garv Bhara, Mastak Mera

ये गर्व भरा, मस्तक मेरा
प्रभु चरण धुल तक, झुकने दे
अहंकार विकार, भरे मन को
निज नाम की माला, जपने दे
ये गर्व भरा ...

मै मन की मैल को, धो न सका
ये जीवन तेरा,  हो न सका
आ हो न सका, मै प्रेमी हूँ
इतना न झुका
गिरभी जो पडूं  तो, उठने दे
ये गर्व भरा ...


मैं ज्ञान की बातों में, खोया
और, कर्म हीन पड़कर सोया
जब आंख खुली, तो मन रोया
जब सोये मुझ को , जागने दे
ये गर्व भरा ...


जैसा होऊं मै, खोटा या खरा,
निर्दोष शरण में , आ तो गया
आ, आ तो गया
इक बार ये, कहदे खाली जा
ये प्रीत की रीत, झलक ने दे
ये गर्व भरा ...

Tuesday, 1 November 2011

तू जो मेरे सुर में Tu jo mere sur mein

तू जो मेरे सुर में - २ 
सुर मिला ले  संग गा ले
तो ज़िन्दगी हो जाए सफल 

तू जो मेरे मन का - २
घर बना ले, मन लगा ले
तो बंदगी हो जाए सफल 

तू जो मेरे सुर में
        
चांदनी रातो में, हाथ लिए हाथो में  
चांदनी रातो में, हाथ लिए हाथो में 
डूबे रहे एक दुसरे की, रस भरी बातो में 

तू जो मेरे संग में - २
मुस्कुरा ले, गुनगुना ले 
तो ज़िन्दगी हो जाए सफल 
तू जो मेरे मन का...
तू जो मेरे सुर में...
          
क्यों हम बहारो से, खुशिया उधार ले 
क्यों हम बहारो से, खुशिया उधार ले
क्यों न मिलके हम खुद ही अपना जीवन सुधार ले 

तू जो मेरे पथ में - २
दीप जलाले हो उजाले
तो बंदगी हो जाए सफल 

तू जो मेरे सुर में - २
सुर मिला ले, संग गा ले
तो ज़िन्दगी हो जाए सफल

रजनीगन्धा फूल तुम्हारे, महके यूं ही जीवन में rajaneegandhaa phool tumhaare

रजनीगन्धा फूल तुम्हारे, महके यूं ही जीवन में
यूं ही महके प्रीत पीया की मेरे अनुरागी मन में

आधिकार ये जब से साजन का हर धड़कन पर माना मैंने
मै जब से उन के साथ बंधी, ये भेद तभी जाना मैंने
कितना सुख हैं बंधन में

हर पल मेरी इन आखों में बस रहते हैं सपने उन के
मन कहता हैं मैं रंगों की, एक प्यार भरी बदली बन के
बरसू उन के आँगन में

न जाने क्यूँ, होता है यह ज़िन्दगी के साथ Na Jaane Kyun, Hota Hai Yeh Zindagi Ke Saath

न जाने क्यूँ, होता है  यह ज़िन्दगी के साथ
अचानक यह मन, किसीके जाने के बाद
करे फिर उसकी याद छोटी छोटी सी बात
न जाने क्यूँ  ...

जो अनजान पल, ढल गए कल, आज वोह
रंग बदल बदल, मन को मचल मचल
रहें है चल, न जाने क्यूँ वोह अनजान पल
सजे भी न मेरे, नैनो में
टूटे रे है रे सपनो के महल
न जाने क्यूँ  ...

वोही है डगर, वोही है सफ़र 
है नहीं साथ मेरे मगर अब मेरा हमसफ़र
इधर उधर ढूंढे नज़र वोही है डगर
कहाँ गयी शामें, मदभरी  
वोह मेरे, मेरे वोह दिन गए किधर
न जाने क्यूँ ...

कई बार यूं भी देखा है Kaee Baar Yoo Bhee Dekhaa Hai

कई बार यूं भी देखा है
ये जो मन की सीमा रेखा है
मन तोड़ने लगता है
अनजानी प्यास के पीछे
अनजानी आस के पीछे
मन दौड़ने लगता है

राहों में, राहों में
जीवन की राहों में
जो खिले हैं फूल फूल मुस्कुरा के
कौन सा फूल चुरा के
रखू मन में सजा के

जानू ना, जानू ना
उलझन ये जानू ना
सुलझाऊ कैसे कुछ समझ ना पाऊ
किस को मीत बनाऊ
किस की प्रीत भूलाऊ

जब दीप जले आना, जब शाम ढले आना (Jab Deep Jale Aana, Jab Shaam Dhale Aana)

जब दीप जले आना, जब शाम ढले आना
संदेस मिलन का भूल न जाना मेरा प्यार न बिसराना
जब दीप जले आना

नीत सांझ सवेरे मिलते हैं
उन्हें देखके तारे खिलते हैं
लेते हैं वादा एक दूजे से कहते हैं चले आना
जब दीप जले आना

नी रे गा, रे गा, प गा  रे  सा  सा  नी

मैं पलकन डगर बुहारुंगा
तेरी राह निहारूंगा
मेरी प्रीत का काजल तुम अपने नैनो में मले आना
जब दीप जले आना

जहां पहेली बार मिले थे हम
जिस जगह से संग चले थे हम
नदिया के किनारे आज उसी
अम्बुआ के तले आना
जब दीप जले आना